नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली पहुंचेंगे। सूत्रों के मुताबिक, जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। करीब सात साल बाद होने वाली इस भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होने की संभावना है।
शी जिनपिंग इससे पहले अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। उस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। इस बार उनकी यात्रा के दौरान सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी प्रमुख नेताओं में शामिल होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे और उनकी जगह विदेश मंत्री के आने की संभावना है। ईरान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपतियों के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के आने के आसार नहीं
बिम्स्टेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत आने की संभावना नहीं है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश की ओर से विदेश मंत्री सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच मौजूदा कूटनीतिक तनाव के बीच यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की जा रही है।
तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन की ओर से एक बयान भी जारी किया गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत है। यात्रा रद्द होने के बाद ऐसी चर्चा थी कि तारिक रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं, लेकिन अब उनके सम्मेलन में भी शामिल होने की संभावना नहीं है।
ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक में अहम प्रस्ताव
इसी बीच ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक भी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से शुक्रवार को आयोजित बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख तथा वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता और सुलह को लेकर साझा मंच बनाने का प्रस्ताव रखा।
सम्मेलन के पहले दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। उन्होंने रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।
